Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 0.5.59-60h: वह न तो अग्नि से प्रभावित होता है, न चोर आदि से भयभीत होता है। वह इस जीवन में किए गए समस्त पापों से तत्काल मुक्त हो जाता है। इस शरीर के अंत में वह अपनी सात पीढ़ियों सहित मोक्ष को प्राप्त करता है। ॥59 1/2॥ | ramayan सर्ग 0.5: रामायण के नवाह श्रवण की विधि, महिमा तथा फल का वर्णन । ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चाग्निर्बाधते तस्य न चौरादिभयं तथा।
एतज्जन्मार्जितै: पापै: सद्य एव विमुच्यते॥ ५९॥
सप्तवंशसमेतस्तु देहान्ते मोक्षमाप्नुयात्।
अनुवाद
वह न तो अग्नि से प्रभावित होता है, न चोर आदि से भयभीत होता है। वह इस जीवन में किए गए समस्त पापों से तत्काल मुक्त हो जाता है। इस शरीर के अंत में वह अपनी सात पीढ़ियों सहित मोक्ष को प्राप्त करता है। ॥59 1/2॥
He is neither affected by fire nor is he afraid of thieves etc. He is instantly freed from all the sins committed in this life. At the end of this body, he attains salvation along with his seven generations. ॥ 59 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥