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श्लोक  0.4.6 
परनिन्दापरो नित्यं जन्तुपीडाकरस्तथा।
हतवान् ब्राह्मणान् गाव: शतशोऽथ सहस्रश:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
दूसरों की आलोचना करना उसका दैनिक कार्य था। वह हमेशा सभी जानवरों को सताता था। उसने कई ब्राह्मणों और सैकड़ों-हज़ारों गायों को मार डाला था।
 
Criticising others was his daily routine. He always used to torment all the animals. He had killed many Brahmins and hundreds, thousands of cows. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)