सनत्कुमार! रामायण का माहात्म्य जो कुछ तुमने पूछा था, वह सब मैंने तुम्हें बता दिया है। अब तुम और क्या सुनना चाहते हो?॥ 45-45॥
Sanatkumar! I have told you everything you asked about the significance of Ramayana. What else do you want to hear?॥ 45-45॥
इति श्रीस्कन्दपुराणे उत्तरखण्डे नारदसनत्कुमारसंवादे रामायणमाहात्म्ये चैत्रमासफलानुकीर्तनं नाम चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥
इस प्रकार श्रीस्कन्दपुराणके उत्तरखण्डमें नारद-सनत्कुमारसंवादके अन्तर्गत रामायणमाहात्म्यके प्रसंगमें चैत्रमासमें रामायण सुननेके फलका वर्णन नामक चौथा अध्याय पूरा हुआ॥ ४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥