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श्लोक  0.4.41 
सूत उवाच
इत्युक्त्वा देवकुसुमैर्मुनिश्रेष्ठमवाकिरत्।
प्रदक्षिणात्रयं कृत्वा नमस्कारं चकार ह॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
सूतजी कहते हैं: ऐसा कहकर कालिका ने महर्षि उत्तंक पर दिव्य पुष्पों की वर्षा की और उनकी तीन बार परिक्रमा करके उन्हें बार-बार प्रणाम किया।
 
Suta says: Having said this, Kalika showered divine flowers on the great sage Uttanka, and circumambulating him thrice, bowed to him repeatedly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)