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ramayan 0.4.39: रामायण की कथा सुनकर वह शिकारी निष्पाप हो गया और अपने दिव्य विमान पर सवार होकर मुनि उत्तंक से इस प्रकार बोला।   |   ramayan सर्ग 0.4: चैत्रमास में रामायण के पठन और श्रवण का माहात्म्य, कलिक नामक व्याध और उत्तङ्क मुनि की कथा   ।   ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  0.4.39 
कथां रामायणस्यापि श्रुत्वा च वीतकल्मष:।
दिव्यं विमानमारुह्य मुनिमेतदथाब्रवीत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
रामायण की कथा सुनकर वह शिकारी निष्पाप हो गया और अपने दिव्य विमान पर सवार होकर मुनि उत्तंक से इस प्रकार बोला।
 
After listening to the tale of Ramayana the hunter became sinless and mounted his celestial plane and spoke to the sage Uttanka as follows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)