Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 0.4.37: उस समय कालिका नामक शिकारी के सारे पाप नष्ट हो गए और रामायण की कथा सुनते ही उसकी तत्काल मृत्यु हो गई।   |   ramayan सर्ग 0.4: चैत्रमास में रामायण के पठन और श्रवण का माहात्म्य, कलिक नामक व्याध और उत्तङ्क मुनि की कथा   ।   ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 4: चैत्रमास में रामायण के पठन और श्रवण का माहात्म्य, कलिक नामक व्याध और उत्तङ्क मुनि की कथा  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  0.4.37 
तस्मिन् क्षणेऽसौ कलिको लुब्धको वीतकल्मष:।
रामायणकथां श्रुत्वा सद्य: पञ्चत्वमागत:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उस समय कालिका नामक शिकारी के सारे पाप नष्ट हो गए और रामायण की कथा सुनते ही उसकी तत्काल मृत्यु हो गई।
 
At that time all the sins of Kalika the hunter were destroyed. He died instantly after listening to the story of Ramayana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)