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श्लोक  0.4.33-34h 
इति वाक्यं समाकर्ण्य कलिकस्य महात्मन:॥ ३३॥
उत्तङ्को नाम विप्रर्षिरिदं वाक्यमथाब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
महामना कालिक के ये वचन सुनकर ब्रह्मर्षि उत्तंक इस प्रकार बोले। 33 1/2
 
Hearing these words of Mahamana Kalik, Brahmarishi Uttanka spoke thus. 33 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)