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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य
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सर्ग 4: चैत्रमास में रामायण के पठन और श्रवण का माहात्म्य, कलिक नामक व्याध और उत्तङ्क मुनि की कथा
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श्लोक 33-34h
श्लोक
0.4.33-34h
इति वाक्यं समाकर्ण्य कलिकस्य महात्मन:॥ ३३॥
उत्तङ्को नाम विप्रर्षिरिदं वाक्यमथाब्रवीत्।
अनुवाद
महामना कालिक के ये वचन सुनकर ब्रह्मर्षि उत्तंक इस प्रकार बोले। 33 1/2
Hearing these words of Mahamana Kalik, Brahmarishi Uttanka spoke thus. 33 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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