Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 0.4.27-28h: जब तक मनुष्य धन कमाकर दान करता है, तब तक लोग उसके भाई-बन्धु बने रहते हैं और उसके सभी मित्र-बन्धु उसके द्वारा कमाए गए धन का सदैव उपभोग करते हैं; परन्तु मूर्ख मनुष्य अपने पापों का दुःख स्वयं ही भोगता है॥27 1/2॥ | ramayan सर्ग 0.4: चैत्रमास में रामायण के पठन और श्रवण का माहात्म्य, कलिक नामक व्याध और उत्तङ्क मुनि की कथा । ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जब तक मनुष्य धन कमाकर दान करता है, तब तक लोग उसके भाई-बन्धु बने रहते हैं और उसके सभी मित्र-बन्धु उसके द्वारा कमाए गए धन का सदैव उपभोग करते हैं; परन्तु मूर्ख मनुष्य अपने पापों का दुःख स्वयं ही भोगता है॥27 1/2॥
As long as a man gives away his wealth after earning it, people remain his brothers and relatives, and all his friends and relatives always enjoy the wealth earned by him; but a foolish man suffers the miseries of his sins all by himself.॥ 27 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥