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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 4: चैत्रमास में रामायण के पठन और श्रवण का माहात्म्य, कलिक नामक व्याध और उत्तङ्क मुनि की कथा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  0.4.26 
मम माता मम पिता मम भार्या ममात्मजा:।
ममेदमिति जन्तूनां ममता बाधते वृथा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘मेरी माता, मेरे पिता, मेरी स्त्री, मेरा पुत्र और मेरा यह घर’ - इस प्रकार आसक्ति जीवों को अनावश्यक रूप से दुःख पहुँचाती है।
 
'My mother, my father, my wife, my son and this home of mine' - in this way attachment unnecessarily causes pain to living beings. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)