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ramayan 0.4.24: अरे! माया बड़ी प्रबल है। यह समस्त जगत को मोहित करके स्त्री, पुत्र, मित्र आदि के द्वारा सब को नाना प्रकार के दुःखों से पीड़ित करती है।   |   ramayan सर्ग 0.4: चैत्रमास में रामायण के पठन और श्रवण का माहात्म्य, कलिक नामक व्याध और उत्तङ्क मुनि की कथा   ।   ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  0.4.24 
अहो बलवती माया मोहयत्यखिलं जगत्।
पुत्रमित्रकलत्राद्यै: सर्वदु:खेन योज्यते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अरे! माया बड़ी प्रबल है। यह समस्त जगत को मोहित करके स्त्री, पुत्र, मित्र आदि के द्वारा सब को नाना प्रकार के दुःखों से पीड़ित करती है।
 
Oh! Maya is very powerful. It enchants the entire world and makes everyone suffer from all kinds of sorrows through wife, son and friend etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)