Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 0.4.17-18h: लुब्धक! बताओ, मैंने तुम्हारा क्या अपराध किया है? इस संसार में लोग जान-बूझकर अपराधियों पर हिंसा करते हैं। सज्जनो! सज्जन लोग निरपराधों पर अनावश्यक हिंसा नहीं करते। 17 1/2। | ramayan सर्ग 0.4: चैत्रमास में रामायण के पठन और श्रवण का माहात्म्य, कलिक नामक व्याध और उत्तङ्क मुनि की कथा । ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मया किमपराद्धं ते तद् वद त्वं च लुब्धक।
कृतापराधिनो लोके हिंसां कुर्वन्ति यत्नत:॥ १७॥
न हिंसन्ति वृथा सौम्य सज्जना अप्यपापिनम्।
अनुवाद
लुब्धक! बताओ, मैंने तुम्हारा क्या अपराध किया है? इस संसार में लोग जान-बूझकर अपराधियों पर हिंसा करते हैं। सज्जनो! सज्जन लोग निरपराधों पर अनावश्यक हिंसा नहीं करते। 17 1/2।
Lubdhak! Tell me, what crime have I done to you? In this world people deliberately commit violence against criminals. Gentleman! Gentlemen do not commit unnecessary violence against the innocent. 17 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥