श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 4: चैत्रमास में रामायण के पठन और श्रवण का माहात्म्य, कलिक नामक व्याध और उत्तङ्क मुनि की कथा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  0.4.15 
उत्तङ्कं हन्तुमारेभे उद्यतासिर्मदोद्धत:।
पादेनाक्रम्य तद्वक्षो गलं संगृह्य पाणिना॥ १५॥
 
 
अनुवाद
पागल शिकारी ने एक पैर से मुनि उत्तंक की छाती दबाते हुए एक हाथ से उनका गला पकड़ लिया और उन्हें मारने के लिए अपनी तलवार उठा ली।
 
Pressing the chest of the sage Uttanka with one foot, the mad hunter grabbed his throat with one hand and took up his sword to kill him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)