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श्लोक  0.3.53-54 
भुक्तवन्तौ महाभोगान् यावत्कालं शृणुष्व मे।
युगकोटिसहस्राणि युगकोटिशतानि च॥ ५३॥
उषित्वा रामभवने ब्रह्मलोकमुपागतौ।
तावत्कालं च तत्रापि स्थित्वैन्द्रपदमागतौ॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हम तुम्हें वह समय बता रहे हैं, जब हमने वहाँ सब सुख भोगे। सुनो - लाखों वर्ष और करोड़ों युगों तक श्री रामधाम में रहने के बाद हम ब्रह्मलोक में आए। वहाँ भी उतने ही समय तक रहने के बाद हम इन्द्रलोक में आए। 53-54।
 
We are telling you about the duration for which we enjoyed all the pleasures there. Listen - after living in Shri Ram Dham for millions of years and millions of Yugas, we came to Brahm Lok. After staying there for the same duration, we came to Indra Lok. 53-54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)