श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 3: माघमास में रामायण-श्रवण का फल - राजा सुमति और सत्यवती के पूर्व जन्म का इतिहास  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  0.3.5 
शृणुध्वमृषयश्चित्रमितिहासं पुरातनम्।
सर्वपापप्रशमनं सर्वरोगविनाशनम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महर्षियों! अब आप लोग एक विचित्र प्राचीन कथा सुनिए, जो सब पापों का नाश करने वाली और सब रोगों का नाश करने वाली है॥5॥
 
Maharishis! Now you all listen to a strange ancient story which will eradicate all sins and destroy all diseases. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)