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श्लोक 0.2.73  |
ये पठन्ति सदाऽऽख्यानं भक्त्या शृण्वन्ति ये नरा:।
गंगास्नानाच्छतगुणं तेषां संजायते फलम्॥ ७३॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य सदैव भक्तिपूर्वक रामायण की कथा पढ़ते और सुनते हैं, उन्हें गंगा स्नान से सौ गुना पुण्य फल प्राप्त होता है ॥73॥ |
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| Those people who always read and listen to the story of Ramayana with devotion, get hundred times the virtuous results as compared to bathing in the Ganges. 73॥ |
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इति श्रीस्कन्दपुराणे उत्तरखण्डे नारदसनत्कुमारसंवादे रामायणमाहात्म्ये राक्षसमोक्षणं नाम द्वितीयोऽध्याय:॥ २॥
इस प्रकार श्रीस्कन्दपुराणके उत्तरखण्डमें नारद-सनत्कुमारसंवादके अन्तर्गत वाल्मीकीय रामायणमाहात्म्यके प्रसंगमें राक्षसका उद्धार नामक दूसरा अध्याय पूरा हुआ॥ २॥ |
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