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ramayan 0.2.72: जब कोई मनुष्य एक बार भी 'रामायण' नाम का उच्चारण करता है, तो वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है और अंत में भगवान विष्णु के धाम को जाता है।   |   ramayan सर्ग 0.2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार   ।   ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  0.2.72 
रामायणेति यन्नाम सकृदप्युच्यते यदा।
तदैव पापनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
जब कोई मनुष्य एक बार भी 'रामायण' नाम का उच्चारण करता है, तो वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है और अंत में भगवान विष्णु के धाम को जाता है।
 
When a person utters the name 'Ramayana' even once, he becomes free from all sins and ultimately goes to Lord Vishnu's abode. 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)