श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  0.2.71 
यन्नामस्मरणादेव महापातककोटिभि:।
विमुक्त: सर्वपापेभ्यो नरो याति परां गतिम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
रामायण नाम का स्मरण करने मात्र से मनुष्य करोड़ों महान पापों से मुक्त होकर परम मोक्ष को प्राप्त हो जाता है ॥ 71॥
 
Simply by remembering the name of Ramayana, a man is freed from millions of great sins and attains the ultimate salvation. ॥ 71॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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