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श्लोक 0.2.62-63  |
विप्र उवाच
राक्षसेन्द्र महाभाग मतिस्ते विमलाभवत्॥ ६२॥
अस्मिन्नूर्जे सिते पक्षे रामायणकथां शृणु।
शृणु त्वं राममाहात्म्यं रामभक्तिपरायण॥ ६३॥ |
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| अनुवाद |
| ब्राह्मण ने कहा- महाभाग! राक्षसराज! तुम्हारी बुद्धि शुद्ध हो गई है। इस समय कार्तिक मास का शुक्ल पक्ष चल रहा है। इसमें रामायण की कथा सुनो। रामभक्त राक्षस! तुम श्री रामचंद्रजी का माहात्म्य सुनो। 62-63॥ |
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| The Brahmin said- Mahabhag! Demon King! Your intellect has become pure. At this time Shukla Paksha of Kartik month is going on. Listen to the story of Ramayana in this. Demon devoted to Ram! You listen to the greatness of Shri Ramchandraji. 62-63॥ |
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