Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 0.2.5: वे भगवान विष्णु के भक्त और महात्मा हैं। वे सदैव ब्रह्म के चिंतन में तत्पर रहते हैं। वे अत्यन्त सत्यवादी हैं। वे सहस्रों सूर्यों के समान तेजस्वी हैं और मोक्ष की इच्छा रखते हैं। ॥5॥ | ramayan सर्ग 0.2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार । ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे भगवान विष्णु के भक्त और महात्मा हैं। वे सदैव ब्रह्म के चिंतन में तत्पर रहते हैं। वे अत्यन्त सत्यवादी हैं। वे सहस्रों सूर्यों के समान तेजस्वी हैं और मोक्ष की इच्छा रखते हैं। ॥5॥
He is a devotee of Lord Vishnu and a great soul. He is always engaged in the contemplation of Brahma. He is very truthful. He is as radiant as thousands of Suns and desires salvation. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥