श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 40-42h
 
 
श्लोक  0.2.40-42h 
गौतम उवाच
शृणु रामायणं विप्र वाल्मीकिमुनिना कृतम्।
येन रामावतारेण राक्षसा रावणादय:॥ ४०॥
हतास्तु देवकार्यं हि चरितं तस्य तच्छृणु।
कार्त्तिके च सिते पक्षे कथा रामायणस्य तु॥ ४१॥
नवमेऽहनि श्रोतव्या सर्वपापप्रणाशिनी।
 
 
अनुवाद
गौतम बोले- ब्रह्मन्! सुनो। रामायण काव्य की रचना वाल्मीकि मुनि ने की है। भगवान श्री राम का चरित्र, जिन्होंने अवतार लेकर रावण आदि राक्षसों का वध किया और देवताओं का कार्य पूर्ण किया, रामायण काव्य में वर्णित है। तुम उसे सुनो। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अर्थात् प्रतिपदा से नवमीतक रामायण की कथा सुननी चाहिए। वह समस्त पापों का नाश करने वाली है। 40-41 1/2॥
 
Gautam said- Brahman! Listen. Ramayana poetry has been composed by Valmiki Muni. The character of Lord Shri Ram, who incarnated and killed the demons like Ravana and completed the work of the gods, is described in the Ramayana poetry. You listen to him. The story of Ramayana should be heard on the ninth day of Shukla Paksha of Kartik month i.e. from Pratipada to Navamitak. She is the destroyer of all sins. 40-41 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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