श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  0.2.4 
तेषां नामानि वक्ष्यामि सनकश्च सनन्दन:।
सनत्कुमारश्च तथा सनातन इति स्मृत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम्हें उनके नाम बताता हूँ, सुनो। सनक, सनन्दन, सनत्कुमार और सनातन - ये चार सनकादि माने गए हैं।॥4॥
 
I will tell you their names, listen. Sanaka, Sanandana, Sanatkumara and Sanatana - these four are considered to be Sanakaadi. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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