Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 0.2.32-33h: एक बार सौदास भगवान शिव की आराधना में लीन थे। उसी समय उनके गुरु गौतमजी वहाँ आ पहुँचे; किन्तु सौदास ने खड़े होकर अपने गुरु का अभिवादन भी नहीं किया, जो उनके पास आए थे। | ramayan सर्ग 0.2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार । ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कदाचित् परमेशस्य परिचर्यापरोऽभवत्॥ ३२॥
उपस्थितायापि तस्मै प्रणामं न चकार स:।
अनुवाद
एक बार सौदास भगवान शिव की आराधना में लीन थे। उसी समय उनके गुरु गौतमजी वहाँ आ पहुँचे; किन्तु सौदास ने खड़े होकर अपने गुरु का अभिवादन भी नहीं किया, जो उनके पास आए थे।
Once Saudas was engaged in the worship of Lord Shiva. At that time his Guru Gautamji arrived there; but Saudas did not even stand up and greet his Guru who came near him. 32 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥