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ramayan 0.2.28-29h: नारदजी बोले- ब्रह्मन्! रामायण महर्षि वाल्मीकि के मुख से उत्पन्न हुई है। तुम उसे सुनो। रामायण की अमृतमयी कथा नौ दिनों में सुननी चाहिए। 28 1/2॥   |   ramayan सर्ग 0.2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार   ।   ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  0.2.28-29h 
नारद उवाच
शृणु रामायणं विप्र यद् वाल्मीकिमुखोद‍्गतम्॥ २८॥
नवाह्ना खलु श्रोतव्यं रामायणकथामृतम्।
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले- ब्रह्मन्! रामायण महर्षि वाल्मीकि के मुख से उत्पन्न हुई है। तुम उसे सुनो। रामायण की अमृतमयी कथा नौ दिनों में सुननी चाहिए। 28 1/2॥
 
Naradji said- Brahmin! Ramayana originated from the mouth of Maharishi Valmiki. You listen to him. The nectar-filled story of Ramayana should be heard in nine days. 28 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)