श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  0.2.23-24h 
ऊर्जे मासि सिते पक्षे चैत्रे माघे तथैव च॥ २३॥
नवाह्ना किल श्रोतव्यं रामायणकथामृतम्।
 
 
अनुवाद
सनत्कुमार जी! भगवान की महिमा समझने के लिए कार्तिक, माघ और चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में नौ दिन तक रामायण की अमृतमयी कथा का श्रवण करना चाहिए।
 
Sanatkumara ji! To understand the greatness of God one should listen to the nectar-like story of Ramayana for nine days in the Shukla Paksha of Kartik, Magh and Chaitra. 23 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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