vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य
»
सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार
»
श्लोक 22-23h
श्लोक
0.2.22-23h
रामायणपरा ये तु घोरे कलियुगे द्विजा:॥ २२॥
त एव कृतकृत्याश्च तेषां नित्यं नमोऽस्तु ते।
अनुवाद
जो ब्राह्मण घोर कलियुग में रामायण कथा का आश्रय लेते हैं, वे धन्य हैं। उन्हें सदैव नमस्कार करना चाहिए॥22 1/2॥
Those Brahmins who take shelter of the Ramayana story in the terrible Kaliyug are the ones who are blessed. You should always salute them. ॥ 22 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×