श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  0.2.22-23h 
रामायणपरा ये तु घोरे कलियुगे द्विजा:॥ २२॥
त एव कृतकृत्याश्च तेषां नित्यं नमोऽस्तु ते।
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण घोर कलियुग में रामायण कथा का आश्रय लेते हैं, वे धन्य हैं। उन्हें सदैव नमस्कार करना चाहिए॥22 1/2॥
 
Those Brahmins who take shelter of the Ramayana story in the terrible Kaliyug are the ones who are blessed. You should always salute them. ॥ 22 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)