श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 1: कलियुग की स्थिति, कलिकाल के मनुष्यों के उद्धार का उपाय, रामायणपाठ, उसकी महिमा, उसके श्रवण के लिये उत्तम काल आदि का वर्णन  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  0.1.8-9 
स्त्रिय: स्वपोषणपरा वेश्याचरणतत्परा:॥ ८॥
पतिवाक्यमनादृत्य सदान्यगृहतत्परा:।
दु:शीलेषु करिष्यन्ति पुरुषेषु सदा स्पृहाम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उस युग की स्त्रियाँ अपने शरीर के पालन-पोषण में ही लगी रहेंगी और वेश्याओं का सा आचरण करेंगी। वे सदैव दूसरों के घर जाएँगी और अपने पतियों की आज्ञा का अनादर करेंगी। वे सदैव दुष्ट पुरुषों से मिलने की इच्छा रखेंगी। 8-9.
 
The women of that era will be devoted to nourishing their own bodies and will behave like prostitutes. They will always go to other people's houses, disrespecting their husbands' orders. They will always desire to meet wicked men. 8-9.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)