श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 1: कलियुग की स्थिति, कलिकाल के मनुष्यों के उद्धार का उपाय, रामायणपाठ, उसकी महिमा, उसके श्रवण के लिये उत्तम काल आदि का वर्णन  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  0.1.7-8h 
कामार्त्ता ह्रस्वदेहाश्च लुब्धा अन्योन्यतत्परा:॥ ७॥
कलौ सर्वे भविष्यन्ति स्वल्पायुर्बहुपुत्रका:।
 
 
अनुवाद
कलियुग के सभी लोग विषयवासनाओं से ग्रस्त होंगे, अल्प शरीर वाले और लोभी होंगे, धर्म और ईश्वर का आश्रय त्यागकर एक-दूसरे पर आश्रित रहेंगे। प्रायः सभी लोग अल्पायु और अधिक सन्तान वाले होंगे।*॥7 1/2॥
 
All the people of Kaliyug will be afflicted with sexual urges, will be short bodied and greedy and will abandon the shelter of religion and God and will be dependent on each other. Almost all the people will have a short lifespan and will have more children*॥ 7 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)