श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 1: कलियुग की स्थिति, कलिकाल के मनुष्यों के उद्धार का उपाय, रामायणपाठ, उसकी महिमा, उसके श्रवण के लिये उत्तम काल आदि का वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  0.1.5 
एतत्संसारपाशस्यच्छेदक: कतम: स्मृत:।
कलौ वेदोक्तमार्गाश्च नश्यन्तीति त्वयोदिता:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इस संसार के बंधन को तोड़ने वाला कौन है? आपने कहा है कि कलियुग में वैदिक मार्ग नष्ट हो जायेंगे।॥5॥
 
Who is the one who will break this bondage of the world? You have said that in Kaliyuga, the Vedic paths will be destroyed. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)