चित्रकूटालयं राममिन्दिरानन्दमन्दिरम्।
वन्दे च परमानन्दं भक्तानामभयप्रदम्॥ २॥
अनुवाद
मैं भगवान श्री रामचंद्रजी को नमस्कार करता हूँ, जो देवी लक्ष्मी (सीता) के आनंदनिकेतन चित्रकूट में निवास करते हैं, जो आनंद के स्वरूप हैं और भक्तों को अभय प्रदान करते हैं॥2॥
I salute Lord Shri Ramchandraji, who resides in Chitrakoot, the Anandniketan of Goddess Lakshmi (Sita) and who is the embodiment of bliss and gives fearlessness to the devotees. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥