श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 1: कलियुग की स्थिति, कलिकाल के मनुष्यों के उद्धार का उपाय, रामायणपाठ, उसकी महिमा, उसके श्रवण के लिये उत्तम काल आदि का वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  0.1.10 
असद्वार्त्ता भविष्यन्ति पुरुषेषु कुलांगना:।
परुषानृतभाषिण्यो देहसंस्कारवर्जिता:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उच्च कुल की स्त्रियाँ भी परपुरुषों से अभद्र भाषा बोलेंगी, कटु वचन बोलेंगी और झूठ बोलेंगी तथा शरीर को शुद्ध और सुसंस्कारी रखने वाले गुणों से वंचित हो जाएँगी।॥10॥
 
Even women of high families will speak vulgarly to other men, will speak harsh words and will tell lies, and will be deprived of the virtues that keep the body pure and well-mannered.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)