| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 97a |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 97a  | कलिमल ग्रसे धर्म सब लुप्त भए सदग्रंथ।
दंभिन्ह निज मति कल्पि करि प्रगट किए बहु पंथ॥97 क॥ | | | | अनुवाद | | | | कलियुग के पापों ने सभी धर्मों को ग्रस लिया, पवित्र शास्त्र लुप्त हो गए, अभिमानी लोगों ने अपनी बुद्धि से कल्पना करके अनेक संप्रदायों को जन्म दिया। | | | | The sins of Kaliyug engulfed all the religions, the holy scriptures got lost, the arrogant people, by imagining with their intellect, gave birth to many sects. | |
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