| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 8b |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 8b  | सुमन बृष्टि नभ संकुल भवन चले सुखकंद।
चढ़ी अटारिन्ह देखहिं नगर नारि नर बृंद॥8 ख॥ | | | | अनुवाद | | | | आनन्दकन्द श्री रामजी अपने महल को चले, आकाश पुष्पवर्षा से आच्छादित हो गया। नगर के नर-नारियों के समूह उनके दर्शन के लिए छतों पर चढ़ आए। | | | | Anandkand Shri Ramji left for his palace, the sky was covered with a shower of flowers. Groups of men and women of the city climbed the terraces to have his darshan. | |
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