| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 76 |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 76  | रेखा त्रय सुंदर उदर नाभी रुचिर गँभीर।
उर आयत भ्राजत बिबिधि बाल बिभूषन चीर॥ 76॥ | | | | अनुवाद | | | | उदर पर तीन सुन्दर रेखाएँ (त्रिवली) हैं, नाभि सुन्दर एवं गहरी है। विशाल वक्षस्थल पर अनेक प्रकार के बालकों के आभूषण एवं वस्त्र सुशोभित हैं। | | | | There are three beautiful lines (trivali) on the abdomen, the navel is beautiful and deep. Many types of children's ornaments and clothes are decorated on the huge chest. | |
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