| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 73b |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 73b  | निर्गुन रूप सुलभ अति सगुन जान नहिं कोई।
सुगम अगम नाना चरित सुनि मुनि मन भ्रम होई॥ 73 ख॥ | | | | अनुवाद | | | | निर्गुण रूप तो बहुत सुगम (आसानी से समझ में आने वाला) है, परन्तु सगुण रूप (गुणों से परे दिव्य रूप) को कोई नहीं जानता। इसलिए उस सगुण परमेश्वर के नाना प्रकार के सुगम और दुर्गम चरित्रों को सुनकर मुनियों के भी मन भ्रमित हो जाते हैं। | | | | The Nirgun form is very easy (easily understood), but no one knows the Sagun form (divine form beyond qualities). Therefore, on listening to various types of easy and inaccessible characters of that Sagun God, the minds of even the sages get confused. | |
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