| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 72b |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 72b  | जथा अनेक बेष धरि नृत्य करइ नट कोइ।
सोइ सोइ भाव देखावइ आपुन होइ न सोइ॥ 72 ख॥ | | | | अनुवाद | | | | जैसे एक अभिनेता (कलाकार) विभिन्न वेशभूषा पहनकर नृत्य करता है और वेशभूषा के अनुसार ही भाव प्रदर्शित करता है, परन्तु वह स्वयं उनमें से कुछ नहीं बनता। | | | | Just as an actor (artist) dances wearing various costumes and shows the same expressions (according to the costume), but he himself does not become any of them. | |
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