| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 71b |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 71b  | सो दासी रघुबीर कै समुझें मिथ्या सोपि।
छूट न राम कृपा बिनु नाथ कहउँ पद रोपि॥ 71 ख॥ | | | | अनुवाद | | | | वह माया श्री रघुवीर की दासी है। यद्यपि वह समझने पर मिथ्या है, तथापि श्री रामजी की कृपा के बिना उससे छुटकारा नहीं हो सकता। हे नाथ! मैं वचन देकर कहता हूँ। | | | | That Maya is the maid of Shri Raghuveer. Though it is false when understood, it cannot be got rid of without the grace of Shri Ramji. O Nath! I say this with a promise. | |
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