श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  दोहा 63a
 
 
काण्ड 7 - दोहा 63a 
नाथ कृतारथ भयउँ मैं तव दरसन खगराज।
आयसु देहु सो करौं अब प्रभु आयहु केहि काज॥63 क॥
 
अनुवाद
 
 हे नाथ! हे पक्षीराज! आपके दर्शन से मैं धन्य हो गया। अब आप जो आज्ञा देंगे, मैं वही करूँगा। हे प्रभु! आप किस कार्य से आए हैं?
 
O Nath! O King of birds! I am blessed by your darshan. Now I will do whatever you command. O Lord! What work have you come for?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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