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काण्ड 7 - दोहा 56 
सीतल अमल मधुर जल जलज बिपुल बहुरंग।
कूजत कल रव हंस गन गुंजत मंजुल भृंग॥56॥
 
अनुवाद
 
 इसका जल शीतल, स्वच्छ और मीठा है, इसमें अनेक रंग-बिरंगे कमल खिले हुए हैं, हंस मधुर स्वर में बोल रहे हैं और भौंरे सुन्दर गुनगुना रहे हैं।
 
Its water is cool, clear and sweet, many colourful lotuses are blooming in it, the swans are speaking in sweet voices and the bumblebees are humming beautifully.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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