श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  दोहा 54
 
 
काण्ड 7 - दोहा 54 
राम परायन ग्यान रत गुनागार मति धीर।
नाथ कहहु केहि कारन पायउ काक सरीर॥54॥
 
अनुवाद
 
 हे नाथ! कहो, (इस प्रकार) श्री रामपरायण, ज्ञान निरत, गुणधाम और धीरबुद्धि भुशुण्डिजी को कौवे का शरीर क्यों मिला?
 
Hey Nath! Say, (like this) why did Shri Ramparayan, Gyan Nirat, Gunadham and Dhirbuddhi Bhusundiji get the body of a crow?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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