| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 53 |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 53  | बिरति ग्यान बिग्यान दृढ़ राम चरन अति नेह।
बायस तन रघुपति भगति मोहि परम संदेह॥53॥ | | | | अनुवाद | | | | अतः मुझे इस बात में प्रबल संदेह है कि कौए का शरीर पाकर भी काकभुशुण्डि वैराग्य, ज्ञान और विज्ञान में दृढ़ हैं, श्री राम जी के चरणों में उनका अगाध प्रेम है और श्री रघुनाथ जी की भक्ति भी उनमें है। | | | | So, I have strong doubts about the fact that even after getting the body of a crow, Kaakbhushundi is firm in detachment, knowledge and science, he has immense love for the feet of Shri Ram Ji and he also has the devotion of Shri Raghunath Ji. | |
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