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काण्ड 7 - दोहा 5  |
पुनि प्रभु हरषि सत्रुहन भेंटे हृदयँ लगाइ।
लछिमन भरत मिले तब परम प्रेम दोउ भाइ॥5॥ |
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| अनुवाद |
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| तब भगवान प्रसन्न हुए और शत्रुघ्न को गले लगाकर उनसे मिले। फिर लक्ष्मण और भरत दोनों भाई अत्यंत प्रेम से मिले। |
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| Then the Lord became happy and embraced Shatrughna and met him. Then both the brothers Laxman and Bharat met with utmost love. |
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