| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 49 |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 49  | नाथ एक बर मागउँ राम कृपा करि देहु।
जन्म जन्म प्रभु पद कमल कबहुँ घटै जनि नेहु॥49॥ | | | | अनुवाद | | | | हे प्रभु! हे प्रभु राम! मैं आपसे एक वरदान माँगता हूँ, कृपा करके मुझे वह प्रदान करें। प्रभु (आपके) चरणों में मेरा प्रेम किसी भी जन्म में कम न हो। | | | | O Lord! O Lord Rama! I ask you for a boon, kindly grant it to me. May my love for the Lord's (your) feet never decrease in any birth. | |
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