श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  दोहा 47
 
 
काण्ड 7 - दोहा 47 
उमा अवधबासी नर नारि कृतारथ रूप।
ब्रह्म सच्चिदानंद घन रघुनायक जहँ भूप॥47॥
 
अनुवाद
 
 (भगवान शिव कहते हैं-) हे उमा! अयोध्या में रहने वाले सभी नर-नारी धन्य हैं, जहाँ सच्चिदानन्दघन ब्रह्मा श्री रघुनाथजी स्वयं राजा हैं।
 
(Lord Shiva says-) O Uma! All the men and women living in Ayodhya are blessed, where the Sachchidanandaghan Brahma Shri Raghunathji himself is the king.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas