| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 46 |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 46  | मम गुन ग्राम नाम रत गत ममता मद मोह।
ता कर सुख सोइ जानइ परानंद संदोह॥46॥ | | | | अनुवाद | | | | जो पुरुष मेरे गुणों और मेरे नाम में लीन है तथा आसक्ति, अहंकार और मोह से मुक्त है, उसका सुख वही जानता है जिसने (परमात्मा के स्वरूप में) परम आनंद प्राप्त कर लिया है। | | | | He who is devoted to my qualities and my name and is free from attachment, arrogance and infatuation, his happiness is known only to him who has attained the supreme bliss (in the form of the Supreme Being). | |
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