| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 39 |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 39  | पर द्रोही पर दार रत पर धन पर अपबाद।
ते नर पाँवर पापमय देह धरें मनुजाद॥39॥ | | | | अनुवाद | | | | वे दूसरों के साथ विश्वासघात करते हैं, दूसरों की स्त्री, धन और दूसरों की बदनामी में आसक्त रहते हैं। ये पापी मनुष्य रूप में राक्षस हैं। | | | | They betray others and are attached to other's women, wealth and defamation of others. These sinners are demons in human form. | |
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