| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 34 |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 34  | परमानंद कृपायतन मन परिपूरन काम।
प्रेम भगति अनपायनी देहु हमहि श्रीराम॥34॥ | | | | अनुवाद | | | | आप आनंद के स्वरूप, दया के धाम और समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं। हे श्री राम! हमें अपना अटूट प्रेम और भक्ति प्रदान कीजिए। | | | | You are the embodiment of bliss, the abode of kindness and the fulfiller of all desires. O Shri Ram! Give us your unwavering love and devotion. | |
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