| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 32 |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 32  | देखि राम मुनि आवत हरषि दंडवत कीन्ह।
स्वागत पूँछि पीत पट प्रभु बैठन कहँ दीन्ह॥32॥ | | | | अनुवाद | | | | श्री रामचन्द्र जी ने सनकादि ऋषियों को आते देख प्रसन्न होकर उन्हें प्रणाम किया और उनका स्वागत करके उनका कुशलक्षेम पूछने के बाद प्रभु ने उनके बैठने के लिए अपना पीत वस्त्र बिछा दिया। | | | | Seeing the sages Sankadi coming, Shri Ramachandra ji was delighted and bowed down to them, and after welcoming them and asking about their well-being, the Lord spread his yellow cloth for them to sit. | |
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