श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  दोहा 29
 
 
काण्ड 7 - दोहा 29 
रमानाथ जहँ राजा सो पुर बरनि कि जाइ।
अनिमादिक सुख संपदा रहीं अवध सब छाइ॥29॥
 
अनुवाद
 
 जिस नगरी के स्वयं भगवान लक्ष्मीपति राजा हों, क्या उसका वर्णन कहीं हो सकता है? अणिमा आदि आठ सिद्धियाँ तथा समस्त सुख-संपत्तियाँ अयोध्या में विद्यमान हैं।
 
Can the city where the lord Lakshmipati himself is the king be described anywhere? The eight siddhis like Anima etc. and all the happiness and riches are present in Ayodhya.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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