| श्री रामचरितमानस » काण्ड 7: उत्तर काण्ड » दोहा 28 |
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| | | | काण्ड 7 - दोहा 28  | उत्तर दिसि सरजू बह निर्मल जल गंभीर।
बाँधे घाट मनोहर स्वल्प पंक नहिं तीर॥28॥ | | | | अनुवाद | | | | शहर के उत्तर में सरयू नदी बहती है, जिसका पानी साफ़ और गहरा है। सुंदर घाट बने हैं, किनारों पर ज़रा भी कीचड़ नहीं है। | | | | Saryu river flows to the north of the city, whose water is clear and deep. Beautiful ghats have been built, there is not even a bit of mud on the banks. | |
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