श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  दोहा 23
 
 
काण्ड 7 - दोहा 23 
बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप जेतनेहि काज।
मागें बारिद देहिं जल रामचंद्र कें राज॥23॥
 
अनुवाद
 
 श्री रामचन्द्रजी के राज्य में चन्द्रमा अपनी (अमृततुल्य) किरणों से पृथ्वी को परिपूर्ण कर देता है। सूर्य आवश्यकतानुसार ही प्रकाश देता है और बादल माँगने पर (जहाँ और जहाँ भी आवश्यकता हो) जल देते हैं।
 
In the kingdom of Shri Ramchandraji, the moon fills the earth with its (nectar-like) rays. The sun shines as much as is needed and the clouds give water (whenever and wherever required) on demand.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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